एक दीवाली ऐसी बीती
कानों में अनवरत पटाखे, आँखें ताक रहीं थीं भीति, एक दीवाली ऐसी बीती। कुछ तो हो-कुछ तो हो,कहकर, मन तो उछल रहा था बल्ली, अरमानों को पंख लगे थे , कदमों की थी गति पुछल्ली। अल्हङपन अधमरा रह गया, अब के मायूसी ही जीती; एक दीवाली ऐसी बीती। कंधों के बाज़ार हो ग...
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RUPAK_REWA
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[28 Oct 2008 16:11 PM]



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