सूरज नहीं डूबने दूँगा
एक वर्ष और बीत गया, हर वर्ष की भाँति समय की चौखट पर फिर क़दमों की रफ़्तार मंद हो चली है, थोङी बेचैनी, थोङी उदासी, कुछ झूठी सच्ची उम्मीदें, और गठरी भर अधूरे वादे और सपने, ...आग़ाज़!, शुरूआत!, शुभारंभ!,उदघाटन!, ये शब्द बङे रंगीन से हैं, रोशन और आशा से भ...
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RUPAK_REWA
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[31 Dec 2008 13:13 PM]



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