पाती

Mahendra's Blog नहीं भूला हूं वो दर्द, वो तकलीफ जो सहे मैंने रो-रो के मनमीत......... कि‍स जुर्म की है ये सजा समझता हूं मैं, हूं बेगुनाह समझ आता नहीं फि‍र क्‍यों न बहें आंखों से आंसुओं की झील कि‍सी को खबर नहीं बि‍लकुल क्‍या बीती मुझ पर, तेरे सि‍वा मैं जब भी रोया न दे... [पूरी पोस्ट]
writer Mahendra
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[22 Jun 2009 03:43 AM]

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