क्‍या से क्‍या हो गया

Mahendra's Blog कहां था मैं अब कहां हूं कि‍धर चला था कहां जा पहुचां हूं कि‍न ऊचांईयों को छूता था कि‍न गहराइयों में डूब गया क्‍या था मैं, क्‍या हो गया । मानो आसमां का सि‍तारा था अब सागर की गहराइयों का पत्‍थर हो गया उँचे घाट से वास्‍ता था मेरा मानो सागर में उतर गया क्... [पूरी पोस्ट]
writer Mahendra
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[21 Jun 2009 11:34 AM]

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