एक तू ही मुझे मिल जाए
मेरे सब्र का पैमाना छलक न जाए तू देख जरा, जिन्दगी से आगे मौत निकल न जाए तेरे इम्ितहां की हद और क्या होगी तू सम्हाल जरा, तेरे कदमों तक मुझे कामयाबी मिल जाए । इम्ितहां की कहीं इन्ितहां न हो जाए तेरी ये रजा, मेरे लिए कहीं सजा न बन जाए इस रा...
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Mahendra
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[21 Jun 2009 11:31 AM]



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