कर्मों के खेल

Mahendra's Blog कर्मों का खेल है ये, नहीं मैं गुनहगार मि‍ले कोई ऐसा जो त्रि‍गुण को लगाए फटकार... क्‍यों मुझको रूलाया ? क्‍यों मुझको सताया ? क्‍यों मुझको डराया ? क्‍यों मुझको जलाया ? है कोई क्‍या ? इन सब का जबाब मि‍ले कोई ऐसा जो त्रि‍गुण से करे पूछताछ । कर्मों का खेल... [पूरी पोस्ट]
writer Mahendra
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[21 Jun 2009 11:20 AM]

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