कवि‍ता

Mahendra's Blog दुखती रग पर कोई हाथ रखे आह- आह कर चि‍ल्‍लाए हर कोई जो उसका कोई बखान करे तो वाह-वाह कह उठता हर कोई दर्द का ये कैसा रोग । जब शब्‍द नहीं मि‍लते दर्द के मापदण्‍ड के लि‍ए घुमा-फि‍रा कर, शब्‍दों के हेर फेर से इस लहजे हम कहने लगे ये अंदाज शायराना, और हम शाय... [पूरी पोस्ट]
writer Mahendra
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[21 Jun 2009 10:58 AM]

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