उदासी
अन्तर में छाई कोई उदासी तोड़ने के हर संभव प्रयत्न किये उदासी को मेरी वो तोड़ न सके खुद ही की शय, खुद ही मात खाते गये। उदासी है ये उसके लिए जिसे हम छोड़ आए बिछड़ गए, जुदा हुए प्रेम है ये, रूप वियोग का लिए। मुझे लूटने की हसरत लिए वो आप ही दफन...
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Mahendra
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[21 Jun 2009 10:40 AM]



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