उदासी

Mahendra's Blog अन्‍तर में छाई कोई उदासी तोड़ने के हर संभव प्रयत्‍न कि‍ये उदासी को मेरी वो तोड़ न सके खुद ही की शय, खुद ही मात खाते गये। उदासी है ये उसके लि‍ए जि‍से हम छोड़ आए बि‍छड़ गए, जुदा हुए प्रेम है ये, रूप वि‍योग का लि‍ए। मुझे लूटने की हसरत लि‍ए वो आप ही दफन... [पूरी पोस्ट]
writer Mahendra
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[21 Jun 2009 10:40 AM]

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