प्‍यासा मन

Mahendra's Blog मैं प्‍यासा रह गया जब कि‍ पास था समन्‍दर...... लहरों का शोर लगातार ये कहता वेग, ये कौन सम्‍हाल पाया है जा, जा के समा जा मैं मछली सा छटपटाता तड़पता सा रह गया । मैं प्‍यासा रह गया जब कि‍ पास था समन्‍दर...... क्‍यों न डूब सका मेरा जहॉं, दो कदम पर ही तो... [पूरी पोस्ट]
writer Mahendra
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[21 Jun 2009 10:29 AM]

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