मैं अपने प्रीतम की

Mahendra's Blog चाहे हाथ उठाओ चाहे हाथ फैलाओ लेकि‍न मैं अपनी जान नहीं दूँगी तुम्‍हें ... जान ये मेरी, मेरे प्रीतम की आन ये मेरी, मेरे प्रीतम की रह लूँगी बनके दासी, स्‍वामी चरनन की पर ये जान नहीं दूँगी तेरे हाथों में चाहे सजा दो, चाहे दात चाहो लेकि‍न मैं अपनी जान नही... [पूरी पोस्ट]
writer Mahendra
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[21 Jun 2009 10:25 AM]

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