स्वार्थों के होते मेहमान-हिंदी शायरी

मस्तराम का का दर्शन  और साहित्य चेहरे पर है दिखावटी मुस्कान नहीं होता नीयत का भान बदन पर हैं जगमगाते वस्त्र धारण किए दिल में काली नियत लिए भरोसे के लिए निकल रहे हैं शब्द जुबान से निरंतर विश्वास और धोखे का मालुम नहीं अन्तर मन की आंखों से पढोगे जब उनको उनके शब्दों के अर्थों का अर्थ स... [पूरी पोस्ट]
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Hindiशेरvyangyashayriहास्य कविताsahitya

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[01 Mar 2008 00:32 AM]

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