वह एक है, पर नाम अनेक-हिंदी शायरी

मस्तराम का का दर्शन  और साहित्य हमने पूछा दुनिया के मालिक का पता उन्होने ढोल बजाने वालों का घर बता दिया जो पहुंचे वहाँ सुना शोर तो हमने मालिक को भुला दिया वह है एक पर नाम अनेक डर था की कहीं हम लें नाम उनका कहीं और अधिक शोर न मच जाये अगर कहीं हमने भीड़ से अलग नाम लिया --------------... [पूरी पोस्ट]
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[01 Mar 2008 11:38 AM]

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