दीवारों पर लिखे सत्य पढे नहीं है-हिंदी शायरी

मस्तराम का का दर्शन  और साहित्य रिश्तों में अब कोई दरार नही है क्योंकि अब लोगों के दिलों में अब उनके लिए कोई जगह बची नहीं है भाई और भाई के बीच अब कोई दीवार नहीं खड़ी नही रह सकती क्योंकि रिश्ता रह गया है जैसे हवा में लटकी तख्ती नफ़रत जैसी कोई बात नहीं है क्योंकि समय के कमी की वजह से क... [पूरी पोस्ट]
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[02 Mar 2008 02:40 AM]

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