तब बदल जायेगा परिदृश्य-हिंदी शायरी

मस्तराम का का दर्शन  और साहित्य रात्रि के शीतल पलों में चन्द्रमा की हल्की रोशनी में देह पर धवल वस्त्र चारों और बिखर रही इत्र की खुशबू हाथों में गुलाब लिए प्रेम की अभिव्यक्ति के लिए निकला है वह कितना सुन्दर लगता है दृश्य पर जब सूरज चमकेगा अपनी अग्नि से धरती को प्रज्जवलित करेगा अपनी... [पूरी पोस्ट]
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शेरvyangyashayrisahitya

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[02 Mar 2008 12:38 PM]

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