फिर क्यों मन मचलता-हिंदी शायरी

मस्तराम का का दर्शन  और साहित्य कभी मन उदास हो कर कहीं चले जाने को करता कहीं और जाकर नये दोस्त ढूँढने के लिए मचलता पर यह है उसकी चंचलता जो सच यहाँ है वही वहाँ भी है धोखे और वफ़ा तो कहीं भी हो सकते जगह बदलने से हालात नही बदल सकते सच जानते हुए भी मन क्यों मचलता... [पूरी पोस्ट]
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[04 Mar 2008 12:06 PM]

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