फिर भी नफ़रत होती नहीं कम -हिंदी शायरी

मस्तराम का का दर्शन  और साहित्य वादा किया था हमने उनसे जिन रास्तों पर होगी उनकी बस्ती कभी नहीं गुजरेंगे उनसे हम उनके पास नहीं रखेंगे कभी कदम चलने के लिए और भी राहें है उसी पर हम चलते जाते फिर भी राह पर टकरा जाते हम करते उनको सलाम तो वह मुहँ फेर चले जाते दुनिया में प्यार की बात कितन... [पूरी पोस्ट]
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[07 Mar 2008 08:42 AM]

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