बंद किये हैं जिन्होंने सोच के दरवाजे-हिंदी शायरी

मस्तराम का का दर्शन  और साहित्य बंद किये हैं जिन्होंने अपनी सोच के दरवाजे किसीका दर्द क्यों सुनेंगे, चाहे बजाओ बाजे अपने दिल में बस अपना ख्याल ही उनको कर जाते हैं दूसरों से हमेशा झूठे वादे अपने मतलब के लिए चाहे जहाँ चले जाते न हो कोई वास्ता तो, पुराने जख्म कर देते ताजे ऐसे लोगों से... [पूरी पोस्ट]
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[07 Mar 2008 20:58 PM]

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