जब तक रहेंगे असलियत से अनजाने-हिंदी शायरी

मस्तराम का का दर्शन  और साहित्य जश्न मनाने के लिए लोग ढूंढते बहाने खाली हैं प्यार से दिल, आंखों से लगते आंसुओं को छलकाने मन में उदासियों का छाया है ढेर खुशियों को ढूँढ़ते हैं टके में सेर खुश होने के मतलब से अनजाने कोई पीता है शराब के जाम कोई ढूँढता अय्याशी के काम नाचने-गाने की महफ़ि... [पूरी पोस्ट]
writer
views
0
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
0
[08 Mar 2008 10:45 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix