इंसान क्यों शेर कहलाना चाहता है-दो हिंदी क्षणिकाओं

मस्तराम का का दर्शन  और साहित्य इंसान कभी इंसान बनकर नहीं रहना चाहता किसी पराये का भला करता नहीं किसी बेबस को सहारा देता नहीं किसी के मन के दर्द का हाल लेता नहीं पर फिर भी फरिश्ता कहलाना चाहता पंजों में नाखून नहीं है जो किसी पर अत्याचार होने से रोक सके पंजों में वह ताकत नहीं है कि... [पूरी पोस्ट]
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[10 Mar 2008 10:04 AM]

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