बिना यकीन के दुनिया चल नहीं सकती-हिंदी शायरी

मस्तराम का का दर्शन  और साहित्य उनका चेहरा देखकर ही हमने उन पर यकीन कर लिया उनकी नीयत से मुहँ फेर लिया जो फेरा उन्होंने मुहँ अपने किये हुए वादे भूल गए हम फिर भी करते रहे उम्मीद पर कभी वादे भी पूरे किये जाते हैं इरादे कितने भी हों बिना मतलब के काम भला इस जमाने में कभी किये जाते हैं... [पूरी पोस्ट]
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[15 Mar 2008 06:56 AM]

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