असल में दानवता सब जगह खेले-हिंदी शायरी

मस्तराम का का दर्शन  और साहित्य प्रहलाद ने तो की थी भक्ति वैभव को दी थी चुनौती तपस्या से मिली थी उसे शक्ति पर आज तो वैभव की रौशनी देखकर सब अंधे हो जाते हैं उसकी शक्ति के आगे सब लाचार नजर आते हैं चकाचौंध में युवक-युवतियों की आसक्ति मन में व्यसनों की चादर ओढे हैं होलिका भी ऐसी चादर क... [पूरी पोस्ट]
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[21 Mar 2008 05:04 AM]

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