आदमी के मिजाज नहीं बदलते-हिंदी शायरी
बहार के मौसम में पेडों पर पते चले आते और पतझड़ में बिछड़ जाते हैं कभी पेडों को पते आने पर खुश होते नहीं देखा उनके बिछड़ने पर रोते नहीं देखा पर इंसानों की आदत हैं हर मौसम में रोना इसलिए उसकी जिन्दगी में हमेशा पतझड़ ही देख पाते हैं जिनके यहाँ आता है बसंत...
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[22 Mar 2008 03:56 AM]



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