जिन्दगी का सच कोई नहीं जानता-हिंदी शायरी

मस्तराम का का दर्शन  और साहित्य कुछ सवालों के जवाब नहीं होते कुछ सवाल ही अपने आप में जवाब होते लाजवाब हैं वह लोग जो सवालों के जाल से दूर होते किसी के सवाल को दो जवाब कुछ का कुछ समझ जाये तो फिर बवाल मच जाये न दो जवाब तो भी मुसीबत ऐसे में बेहतर हैं न किसी की सुने न किसी को कुछ बताएं... [पूरी पोस्ट]
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[05 Apr 2008 05:38 AM]

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