देखने का होता है अपना-अपना नजरिया-हिंदी शायरी

मस्तराम का का दर्शन  और साहित्य देखने का होता है नजरिया अपना-अपना किसी के लिये कोई चीज हकीकत है किसी के लिये होती है सपना कोई कार पर कार बदलता है कोई पैदल ही चलता उसके लिए अपनी कार होती है सपना कोई रहता है ऊंची इमारतों और चमकदार महलों में तो कोई ईंट और पत्थर ढोकर उनका निर्माण कर मज... [पूरी पोस्ट]
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[13 Apr 2008 06:12 AM]

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