छद्म नाम से मोहब्बत मोबाइल हो गयी-हास्य व्यंग्य

मस्तराम का का दर्शन  और साहित्य एक प्रेमी से उसके मित्र ने पूछा-‘तुम्हें यकीन है कि तुम्हारी प्रेमिका तुमको सच्चा प्यार करती है?’ उसने कहा-‘हां, इसमें मुझे कोई संदेह नहीं है। वह अब किसी दूसरे को प्यार कर ही नहीं सकती।’ मित्र ने कहा-‘उसे आजमा कर देख लो। तुमने उसे मोबाइल का उपहार दिय... [पूरी पोस्ट]
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[31 May 2008 01:59 AM]

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