स्त्री शक्ति को नमन

hava pani एक कविता शर्मीला इरोम के लिये (रोश्नी की लकीर) हर शब्द भारी है यहाँ कहाँ हैं मोरपँखी सपनों की उडान कहाँ प्रसँग हैं इंदधनुषी रंगों की मुस्कान कहाँ है तिलिस्मी यौवन का उन्माद पल प्रतिपल की पीडा लेखा जोखा है केवल यहाँ इस सफेद चादर पर चारों दीवारों के बी... [पूरी पोस्ट]
writer vipin-choudhary
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[08 Mar 2009 11:48 AM]

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