कम्प्यूटर की माया
निठल्ला बैठा था, गलत मत समझिये मैं सशरीर ऑफिस में था। अब ऑफिस में ही तो व्यक्ति चिंतन करता है, निठल्ल चिंतन। तो सोच रहा था कि क्या करूं, आठ घंटे कैसे कटें, ध्यान आया कि इस कम्प्यूटर नाम के जीव ने कहते हैं कि सारी दुनिया को एक डिब्बे में समेट...
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पल्लव क. बुधकर
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[28 Sep 2006 23:47 PM]



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