क्योंकि

चाय-चिंतन क्योंकि ...... क्योंकि सपना है अभी भी - इसलिए तलवार टूटे, अश्व घायल कोहरे डूबी दिशायें, कौन दुश्मन, कौन अपने लोग, सब कुछ धुंध-धूमिल, किन्तु कायम युद्ध का संकल्प है अपना अभी भी ...... क्योंकि है सपना अभी भी! तोड़ कर अपने चतुर्दिक का छलावा जबकि घर छोड़ा,... [पूरी पोस्ट]
writer पल्‍लव क. बुधकर
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[23 Jan 2007 09:12 AM]

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