सृजन सम्मान
पुरस्कारों की घोषणा हो गई। अब हल्ला करने की बारी है, उनकी जो छपासी हैं। किचकिच-मिचमिच चलती रहेगी। यह होना ही है और आगे भी होता रहेगा। यह तो प्रकृति का नियम है और इस सबका अलग मजा है। खैर... अनूप जी, ममता जी और अजित जी को मिले इस सम्मान के लिए सारे...
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पल्लव क. बुधकर
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[12 Jan 2008 03:15 AM]



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