GAZA का मुसलमां हो या KASHMIR का हिंदू
ये तेरा अँधेरा है, वो मेरा अँधेरा हर दिल में उतर जायेगी जज्बात की तरह हो जाए अगर शायरी भी बात की तरह सूरज है दफ्न फातिहा पढ़ता है अँधेरा आए न कोई रात यूं गुजरात की तरह महंगा है इतना सच कि खरीदार नहीं हैं बाज़ार में कोई कहाँ सुकरात की तरह गाज़ा का मुसलम...
[पूरी पोस्ट]
Arun Aditya
6
0
0
0
0
[12 Mar 2008 08:47 AM]



Shuffle








