शमीम फरहत को जानते हैं आप

अ आ उर्दू की लिपि में उनकी कोई किताब नहीं कुछ रंग थे। थोड़ी खुशबू थी। थोड़ी धूप थी, कुछ रूप था। इन सब को मिला दो तो एक आदमी बनता था। आदमी से थोड़ा ज्यादा आदमी। दुनियादार से थोड़ा कम दुनियादार। नाम शमीम था और तखल्लुस फरहत। काम था शायरी और कमजोरी थी शराब। दोनो... [पूरी पोस्ट]
writer Arun Aditya
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[18 May 2008 13:51 PM]

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