ठोकर तो पत्थर को भी लगती है
ठोकर हम अपनी रौ में जा रहे होते हैं अचानक किसी पत्थर की ठोकर लगती है और एक टीस सी उठती है जो पैर के अंगूठे से शुरू होकर झनझना देती है दिमाग तक को एक झनझनाहट पत्थर में भी उठती है और हमारे पैर की चोट खाया हुआ हत-मान वह शर्म से लुढ़क जाता है एक ओर एक पल...
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Arun Aditya
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[10 Jun 2008 03:46 AM]



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