अतीत के चलचित्र
कभी निर्मल वर्मा ने यह उपन्यास के सिलसिले में कहा था कि एक अच्छे उपन्यास की पहचान यह होती है कि उन शब्दों में बसा जीवन हमारे खुद के जीवन में उतर आता है. क्या यह सिनेमा का भी सच नहीं है? सिनेमा उतना ही मेरी यादों में बसा है, जितनी कि मेरे वास्तविक जीव...
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[20 Nov 2007 08:21 AM]



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