छोटी सी बात मुहब्बत की...
घर लौटते वक्त, कभी कोई काम करते समय या अनायास सड़क से गुजरते हुए... न जाने कितने सालों से यह गीत मैं गुनगुना उठता हूं. बहुत सादा से शब्दों वाले इस प्रेम गीत का न जाने क्या जादू है.. जो कभी खत्म नहीं होता. लगता है कि किसी के दिल से कोई बहुत सीधी-सच्ची...
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[05 May 2008 10:57 AM]



Shuffle








