सुस्वरा गान विदुषी आदरणीया किशोरी जी और उनकी गायकी :
गणपत विघन हरण गजानन ...सुनते सुनते मन हंसध्वनी के सुश्राव्य मधुर गायन में खो गया ,उनकी आवाज़ मानो कोयल की कुक सी मधुर ,निखल ,निरागस ,मानो माँ शारदा स्वयं कंठ में विराजमान होकर हंसध्वनी के स्वरों के रूप में श्रोता को दिव्य दर्शन दे रही हैं . मैं बात क...
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डॉ.राधिका उमडे़कर बुधकर
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[27 Nov 2008 01:36 AM]



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