क से कक्षा में बैठ कर स से संगीत नही सिखा जा सकता ..

वीणापाणी सा रे गा मा पा ध नि सा ...............कुछ बेसुरे,कनसुरे ,छोटे ,बड़े स्वर मुझे शाम से सुनाई दे रहे थी,फ़िर सुनाई दिया भजन सदा शिव भज मना निस दिन ...........चार साल बाद आज भी वही स्वर सुनाई देते हैं ,उतने ही बेसुरे ,उतने ही कनसुरे फर्क सिर्फ़ इतना ही है... [पूरी पोस्ट]
writer डॉ.राधिका उमडे़कर बुधकर
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[30 Dec 2008 00:13 AM]

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