फरीद के श्लोक- २१
जां कुआरी ता चाउ,विवाही तां मामले॥फरीदा ऐहो पछोताउ,वति कुआरी ना थीऐ॥६३॥कलर केरी छपड़ी,आई ऊलथै हंझ॥चिंजू बोड़नि ना पीवहि,ऊंडण सधी ढंझ॥६४॥हंसु ऊडरि क्रोधै पईआ,लोकु विडारणि जाइ॥गहिला लोकु जाणदा,हंसु ना क्रौधा खाइ॥६५॥फरीद जी कहते हैं कि जब कन्या कुआरी होती...
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परमजीत बाली
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[03 Feb 2009 10:23 AM]



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