आसमान में चमकेंगी टिप्पणियां

या मेरा डर लौटेगा यह कविता मैंने रवीश कुमार जी के ब्लाग कस्बा पर पढ़ी, तो मुझे लगा कि यह मेरे जैसों के लिए लिखी गयी है, जो दिन भर पैदल चलने के बाद भी मोटू हो रहे हैं। वैसे इसके निहितार्थ मैंने दूसरे भी निकाले और झटपट इस पर कमेंट लिखने बैठ गया। लेकिन यह क्या हुआ, पूरे... [पूरी पोस्ट]
writer Pawan Nishant
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[11 Oct 2008 15:38 PM]

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