अकेलेपन को बांटता हुआ मिलूँगा
मंद मंद बह रही इस हवा का कोई अतीत तुम्हें याद है जिसके स्पर्श से छत पर अकेले बैठे एक आदमी ने गुनगुनाते हुए मीलों लंबा पत्र लिखा था दुनिया की सबसे पवित्र नदी में स्नान करने के बाद जिसने एक रंग मलना शुरू किया और रंग धुलने के लिए एक बारिश का इंतजार करता...
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Pawan Nishant
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[27 Nov 2008 14:14 PM]



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