होली में तुम्हारा स्मरण

या मेरा डर लौटेगा पिचकारियों के मौसम में और स्मृतियों के धुंधलेपन में मन में कुछ घुलता सा सफेदी के डेले की तरह विस्फोट करता मन में कोई ढूंढता सा नामजद किंतु गुमशुदा दोस्तों को लाल खून से लिखे शिलालेखों पर कुछ उकेरता सा दिन की तरह बेचैनी लेकर और फिर कुछ डूबता सा झुंझला... [पूरी पोस्ट]
writer Pawan Nishant
views
5
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
0
[09 Mar 2009 02:56 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix