सपने में खुद से बातचीत
चुप बैठी रहूं कुछ न करूं पर कोई शुभचिंतक ऐसा तो है जो मेरी तमाम मुश्किलें हर लेगा उदास रहूँ, अकेली फिरूं भले खुद के लिए कुछ न करूं पर वह ऐसा तो है जो मुस्कुराने को कहेगा मेरे सारे दर्द सहेगा और ज़रूरत पड़ी तो सबके सामने मुझे अपनी बाहों में भर लेगा। सच...
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रश्मि
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[06 Feb 2008 22:49 PM]



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