यादों की तितलियां

रूप-अरूप पता नहीं तुम भिज्ञ हो या अनभिज्ञ मगर ये सत्‍य है। कोई रैना नहीं बीती ऐसी, जब तुम्‍हारी याद ने यादों का भंवर न उठाया हो, मगर क्षणमात्र को ही क्‍योंकि, पश्‍चात़ इसके बड़ी निर्ममता से दमित कर दी जाती हैं यादें कारण शायद तुम्‍हें ज्ञात हो...... [पूरी पोस्ट]
writer रश्मि
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[06 Feb 2008 11:53 AM]

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