अकेलेपन का धुंध

रूप-अरूप जब भी बि‍खरती है मेरे इर्द-र्गि‍द अकेलेपन की गहरी धुंध तुम कि‍सी बहाने अपनी यादों की दस्तक दे जाते हो और घसीट लेते हो जबरन मुझको अपने संग-संग यादों की गलि‍यों में भटकने के लि‍ ए। और मैं जो करती रहती हूं महीनों कोशि‍श तुम्हें भुलाने की वह सारा सब एक झ... [पूरी पोस्ट]
writer रश्मि
views
2
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
0
[22 Feb 2008 16:49 PM]

Free Vedic Astrology From Astrobix