मुखौटे का सच

रूप-अरूप मैंने हर बार की मुखौटे के पीछे इंसान के असली चेहरे को देखने की पहचानने की कोशि‍श मगर मेरी नजरों ने हर बार धोखा खाया क्‍योंकि‍ असली चेहरों के उपर कई परत थे नकली चेहरों के और मैं उनमें उलझती पहचानने की कोशि‍श करती फि‍र खाकर धोखा खामोश बैठ जाती... [पूरी पोस्ट]
writer रश्मि
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[22 Feb 2008 17:00 PM]

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