चांदनी रात में बरसात
क्यों हुई आज फिर चांदनी रात में बरसात हैं ये चांद के आंसू या रोई है रात किसने कहा था फिजाओं से तन्हाई की चादर बिछाने देखो उदास हो कितना रोया है चांद ऐ हवा चल जरा करा तो दे अपने होने का अहसास दे तसल्ली देख तो कितनी भीगी है यह रात।...
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रश्मि
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[22 Feb 2008 16:11 PM]



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