तुम्हारी यादें चुराकर
चले जाओगे जब तुम भी हमसे दामन छुड़ाकर रख लेंगे तुम्हारी यादों को तुमसे चुराकर निगाहों में जब हमारी दर्द का सैलाब उमड़ेगा रो लेंगे किसी कोने में हम सबसे नजरें बचाकर जमाने को न दिखाएंगे हम दिल के दाग कभी तेरी खातिर रखेंगे लबों पे हम तब्बसुम सजाक...
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रश्मि
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[29 Feb 2008 15:45 PM]



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