ये दिल
बेबात ही कभी-कभी भर आता है दिल जाने क्यों कभी-कभी तड़प जाता है दिल चाह कर भी नहीं मिलता जब रोने का बहाना तब अंदर ही अंदर जल जाता है दिल तन्हाइयों से जब जी घबराता है, तब यादों को पास अपने बुलाता है दिल आखिर क्या करें, किससे करें शिकवा यही स...
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रश्मि
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[18 Mar 2008 14:27 PM]



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