गर आप न आए

रूप-अरूप मुद्दतें गुज़र गईं दीदार न हुआ आपका दिल क्या अब तलक भी बेकरार न हुआ आपका गुनाह है अपना ठहराते हैं गुनहगार नसीब को इस बात पे हमें ऐतबार न हुआ आपका गर आप न आए तो थाम लेंगे हम मौत का दामन कह जाएंगे दुनिया को हमसे इंतजार न हुआ आपका...... [पूरी पोस्ट]
writer रश्मि
views
1
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
0
[18 Apr 2008 15:57 PM]

Free Vedic Astrology From Astrobix