गम न कीजिए
नशेमन जला है तो फिर बना लीजिए चमन के उजड़ने का गम न किया कीजिए साए में अंधेरों के वक्त गुजर ही जाएगा वो बैठे हैं पहलू में बस ये सोचा कीजिए करना हो मुश्िकल गर फैसला जिंदगी का हर फैसले को तकदीर पर छोड़ दिया कीजिए दरिम्यां हमारे फासला कम न ह...
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रश्मि
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[27 May 2008 08:04 AM]



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