एक प्रश्‍न

रूप-अरूप एक प्रश्‍न कुरेदता है बार-बार कि‍ जब समय इतना परि‍वर्तनशील है तो क्‍यों अपने दुख-दर्द को बांटता है आदमी,,,, परि‍णति‍ कुछ भी नहीं फि‍र उजालों से छि‍पकर क्‍यों रोता है आदमी।... [पूरी पोस्ट]
writer रश्मि
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[13 Jul 2008 12:36 PM]

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